मैं अभी आपको जो बात बताने वाला हूं उसे सुनने के बाद में आपको इतना हल्का फील होगा आपको लगेगा क्या यह वीडियो कहां रह गए थे। मैं 99% sure हु, कि इस वीडियो को देखने के बाद में आपका आज का दिन, और अगर आप रात को देखे रहे हो तो आपका अगला दिन बहुत अच्छा जाने वाला है। और जब फर्स्ट डे अच्छा जाता है, तब 50% से भी ज्यादा चांसेस बढ़ जाते हैं कि उसका भी नेक्स्ट डे और अच्छा जाए। और उसके बाद में उसका भी नेक्स्ट डे अच्छा जाए उसके 90% चांसेस बढ़ जाते हैं। और ऐसे करते हुए हर दिन अच्छा जाता जाता है। जब तक बीच में कोई दूसरा इवेंट क्रिएट ना हो जब तक रोकना है। अच्छा दिन का मतलब है की प्रॉडक्टीव डे, की पूरे दिन कुछ किया, हर बार कुछ करते रहे, प्रोडक्टिव करते रहे, टाइम वेस्ट नहीं किया। सोने जाए तो लगेगी यार मैंने सारी चीजें की है, उठे तो लगे क्या मुझे सारी चीजें करनी है, हर वक्त काम ही लगे, हर वक्त सीखना ही नजर आए। अपने अब तक जितनी भी मोटिवेशनल वीडियोस देखी होगी उसमें से अब तक कितनी चीजें ईमानदारी से अपने अप्लाई की होगी? आधे से ज्यादा लोग हो गए जिन्होंने बहुत कम बातें एक्चुअल में अप्लाई की होगी Because of low will power, Because of low decipline, मोटिवेशन लेना गलत नहीं है। मैं यहां ज्ञानी बाबा नहीं बनने वाला हु की मोटिवेशन लेना बिलकुल ही गलत है। क्योंकि इस बात को एग्री करने से कोई भी मना नहीं करेगा कि कोई एक इंसान है जिसकी उम्मीद टूटी हुई है। जो हतास है, और दूसरा है जो मोटिवेटेड हैं, तो इन दोनों में से ज्यादा अच्छे से सेक्शन कौन लेगा वह सब को पता है। मोटिवेट होने के साथ में उसी तरह डीमोटिवेट होना भी गलत नहीं है। जब आप परेशान होते हो ना, मई भी होता हु, ओर ये मिथ हो तो दिमाग से निकाल देना की मोटीवेटोर्स जो होते हैं, जो लाइफ चेंजिंग स्पीकरस होते हैं, जितनी भी स्टेज पर बोलने वाले होते हैं, या फिर कैमरे के सामने बोलने वाले होते हैं, जो एनरजी के साथ बोलते हैं वह परेशान नहीं होते। फर्क यह है कि कौन उस परेशानी में ऑब्जर्वर बन रहा है, और कौन परेशान में बस केवल इंतजार कर रहा है कि वक्त निकल जाएगा। आपको कोंसेस ऑब्जर्वर बनना है। अभी ये परेशानी में कोंसेस ऑब्जर्वर बनना क्या होता है? जिसके सामने हार्ड वर्कर भी घुटने टेक दे। जिसके सामने टैलेंटेड लोक भी घुटने टेक दे। तो क्या होता है? होता है कोंसेस ऑब्जर्वर बनना। जिसका फोकस बोहुत तगरा हो। कोई भी स्पोर्ट प्लेयर हो, कोई भी खिलाड़ी हो, कोई भी बंदा हो, कोई भी एक्टर हो, कोई भी आर्टिस्ट हो, उसका सबसे बड़ा टैलंट होता है कि वह कितना, कितना ज्यादा उस मोमेंट में रहकर काम कर सकता है। जितने ज्यादा परेशानी में कॉन्शियस रहकर सोचोगे जितना ज्यादा फोकसड होकर सोचोगे, अगर नेगेटिव थिंकिंग आ रही है तो आप सोच रहे हो कि यह कहां से आ रहे है, यह क्यों आ रही है, और ए कैसे आ रही है, आप यह नहीं सोच रहे हो कि नहीं थिंकिंग आनी.... ए चाहिए अरे मैं तो नेगेटिव बंदा हु।आप एक एक बरिके से समझ रहे हो के ये कियू हो रहा है? अभी मुझे तो फील हो रहा है उसकी वजह क्या है? खाना पीना, मेरे साथ के लोग, मेरे बहुत बड़े सपने देखे लेना उसके बाद में असपे काम नहीं करना तो मुझे वह बुरा फील हो रहा है उसकी वजह से हो रहा है? अगर आपको बुरा फील हो रहा है तो कोई दिक्कत नहीं है, बुरा फील करने में कोई दिक्कत नहीं है, ऐसा नहीं है कि स्ट्रांग लोग रो नहीं सकते, वह बुरा फील कर नहीं सकते, बस यही याद रखना क्या आपको पता है कि आपको बुरा फील क्यों हो रहा है बस। क्या आप कोन्सिऔस हो अपनी फीलिंग को लेकर के, बस यह पता होना चाहिए। गुस्सा आ रहा है तो सच में जिंदगी की वाट लगी है उसकी वजह से आ रहा है? क्योंकि सारी चीजें उथल पुतल हो रखी है उसकी वजह से आपकी frustration दूसरी चीजों में निकल रही है क्या बो वजह है? आप का खाना पीना रीज़न है ? जिसके बझसे आपका आच्छा फीलिंग नहीं हो रहा है किउकी जैसा आप खाते हो वैसा फील करते हो आपको पता नहीं है कि कब आप क्या खा रहे हो उसकी वजह से कब आपको कैसा फील हो रहा है, ये आप को बोहोत बरिके से समझना होता है। क्या जो कुछ भी फील कर रहे हो उसका हिसाब आपको हो। हमें परेशानी में मूड का ग्राफ, फीलिंगस ग्राफ, जब नीचे जाता है जब सारी चीजें सही नहीं जाती होती है वक्त आता है ऐसा जब कुछ भी सही नहीं जा रहा होता है, तब इंतजार नहीं करना है हम पढ़ते हैं ना कई जगह लिखा हुआ के ये वक्त भी निकल जाएगा इंतजार करो हमें इंतजार नहीं करना है, वक्त का नेचर है वह तो निकलेगा ही। आपको इंतजार नहीं करना है आपको conscious observer बनना है। अगर एक्शन लेने का मन नहीं कर रहा है तो कोई बात नहीं कई बार रुकना ठीक होता है। कई बार रुक कर सोचना सही होता है, कई बार परेशान होकर बस लर्निंग करना सही होता है, कई बार ठहेरना सही होता है, क्योंकि ठहेरने के बाद आप का माइंड जो सोच पाता है बो तब नेही सोच पता है जब आप फड़फड़ा रहे होते हो you need to be alert। आपको बहुत ज्यादा अलर्ट होने की जरूरत है इस कॉन्पिटिशन मे। बाहर की दुनिया तो समझनि है कि बाहर आपको क्या-क्या करना है लेकिन आपको अंदर की भी दुनिया समझनि है के आपको कब कैसा फील होता है। कब आप एनर्जेटिक फील करते हो तब आप क्या खा रहे हो उसकी वजह से कब आपको कैसा लग रहा है इस माइंड को इस बॉडी को समझना होगा अंदर की दुनिया समझनि होती है उसके लिए इंटरनेट पे बहुत सारी वीडियो है आप ओ देख सकते हो सोमझो कि कैसे conscious observer बने। कैसे प्रेसेण्ट मोमेंट मे जिये। आप मेडिटेशन करना सीख सकते हो, और आपको यह समझना है, कि अच्छी फीलिंगस कहां से आएगी? कैसे आएगी? क्योंकि मानो या ना मानो अच्छी फीलिंग्स में ही अच्छी चीजें की जा सकती है। बुरा फील होता है उसके बाद में आप अपने आप को कितना पुश करोगे बड़ा काम करने के लिए? 1 दिन 2 दिन 10 दिन एक महीना, दो महीना, आपको लगेगा क्या मैं give up कर देता हूं, लेकिन उस चीज में आप कभी give up नेही कोरोगे जहा आप अच्छा फिल कर रहे हो।तो अच्छा फील कैसे हो उसके पीछे भागो।
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